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Fabulada

लाइब्रेरी

41 कहानियाँ

अभी-अभी लिखी गईं· हिन्दी

पहली-पहली बारHI

मीतू और मीठे आम

आम के बाग में पके आमों की महक भरी थी। मीतू पेड़ के नीचे खड़ी होकर नाक से सूँघ रही थी। सुबह उसने नानी से वादा किया था, "नानी, दोपहर को हम दोनों मीठे आम खाएँगे।…

भावनाएँHI

मीनू की लालटेन

“मम्मी, मैं यहीं खड़ी रहूँगी,” मीनू ने धीरे से कहा। वह आज ही नए घर में आई थी। छत पर बगीचा था, और रस्सी पर रंगीन लालटेनें टँगी थीं। कुछ बच्चे खेल रहे थे। मीनू…

दोस्ती और भलाईHI

मीनू की लाल फ़ीते वाली राखी

मीनू को आँगन की मिट्टी में एक सुनहरा फूल पड़ा मिला। उसने उसे उठाया। अरे, यह तो राखी का फूल है! पर उसमें धागा नहीं था। आज राखी थी। मीनू को अपने छोटे भाई गोलू की…

शरीर और इंद्रियाँHI

मीनू की आधी पिचकारी

"मेरी पिचकारी कहाँ है?" मीनू ने बक्सा खोलते हुए पूछा। आज होली थी। मीनू को सबसे पहले दादी को गुलाबी रंग लगाना था। दादी आँगन में बैठी गुजिया की थाली सजा रही थीं।…

कल्पना और अचरजHI

मीनू की लाल नाव

“चल मेरी नाव, चल!” मीनू ने कहा। उसने अभी-अभी अपनी लाल कागज़ की नाव पानी में रखी थी। बाहर बारिश हो रही थी। आँगन से होकर एक पतली धार बह रही थी। मीनू चाहती थी कि…

मौसम और ऋतुएँHI

मीनू की पतंग बादल के पास

मीनू को गिनती करना इतना पसंद था कि वह सीढ़ियाँ भी गिनकर चढ़ती थी। एक, दो, तीन… बारह सीढ़ियाँ, और फिर छत। आज छत पर अच्छी हवा चल रही थी। मीनू के हाथ में लाल पतंग…

घर-परिवारHI

मीनू और कांच की बरनी

मीनू आँगन की मुंडेर पर मिट्टी के दीये रख रही थी। एक, दो, तीन... पूरे दस। आज दिवाली की रात थी, और मीनू को सारे दीये अपने हाथ से जलाने थे। “धीरे-धीरे जलाना,…

मौसम और ऋतुएँHI

मीनू और गाने वाला फाटक

“मैं आज अपना बीज ज़रूर बोऊँगी!” मीनू ने कहा। दादी ने उसे एक नन्हा, काला बीज दिया था, बिल्कुल तिल जितना छोटा। मीनू ने उसे हथेली पर रखा और फाटक के पास आँगन में…

शरीर और इंद्रियाँHI

बिट्टू और गाने वाला फाटक

बिट्टू एक पैर पर कूदता हुआ आँगन में दौड़ रहा था। सुबह की धूप अभी-अभी खेत पर उतरी थी। मुर्गा बोल चुका था, गाय उठ चुकी थी, और आँगन का फाटक अपनी रोज़ की धुन गा…

मौसम और ऋतुएँHI

बारिश का दिन

मीनू के जूते चलते समय चूँ-चूँ बोलते थे। पूरी गली में किसी और के जूते ऐसे नहीं बोलते थे। उस दिन सुबह से बारिश हो रही थी। नीम के पेड़ के नीचे एक बड़ा पोखर बन गया…

मौसम और ऋतुएँHI

मीनू और ठंडा पेड़

"मुझे ठंड लग रही है," आँगन के नीम ने धीरे से कहा। मीनू ने यह सुना और झट से दौड़ी आई। नीम रोज़ मीनू से बातें करता था। इसमें किसी को अचरज नहीं था। पर आज उसकी…

शरीर और इंद्रियाँHI

मीनू और गुनगुनाता पुल

“मेरा ब्रश कहाँ है?” मीनू ने पूछा। रात हो गई थी। मीनू को दाँत साफ़ करके सोना था। पेस्ट शेल्फ़ पर रखा था। कप भी रखा था। बस ब्रश नहीं था। “ब्रश, ब्रश, कहाँ है…

शरीर और इंद्रियाँHI

मीतू की नाक बहुत ख़ास थी। वह बारिश को आने से पहले सूँघ लेती थी।

एक दोपहर उसने आँगन में हवा सूँघी और दौड़कर बोली, “नानी, बारिश आ रही है!” नानी खाट पर लेटी थीं। उनकी नाक बंद थी। “मुझे तो कुछ सूझता ही नहीं,” वे बोलीं। “काश,…

शरीर और इंद्रियाँHI

मीनू की छींक

मीनू को छुपम-छुपाई में जीतना था, इस बार भैया से ज़रूर। भैया गोलू दीवार की तरफ़ मुँह करके गिन रहा था, "एक, दो, तीन…" मीनू भागकर बड़ी अलमारी में घुस गई। अंदर…

शरीर और इंद्रियाँHI

स्पेशल कंबल

बारिश के बाद घर का आँगन गीला और चमकदार था। टीनू वहाँ अपना पीला कंबल लेकर खड़ी थी। कंबल के कोने पर एक छोटा-सा तारा बना था। उसके बिना टीनू को नींद नहीं आती थी।…

हमारे मददगारHI

मीनू और डाकिया काका की घंटी

मीनू ऐसी लड़की थी जो रोज़ सुबह मुर्गे से भी पहले उठ जाती थी, क्योंकि उसे डाकिया काका का इंतज़ार रहता था। आज उसके पास नानी के लिए एक चित्र था। उसमें लाल सूरज था…

हमारे मददगारHI

लाइब्रेरी का शांत कोना

मीनू की हिचकी बाकी सबकी हिचकी जैसी नहीं थी। उसकी हिचकी साइकिल की घंटी की तरह बजती थी: टिंग! मीनू को लाइब्रेरी का शांत कोना सबसे अच्छा लगता था। वहाँ एक नरम…

हमारे मददगारHI

गुनगुनाती दमकल गाड़ी लाली

लाली एक लाल दमकल गाड़ी थी, और उसकी घंटी बजती नहीं थी, गुनगुनाती थी। टन-टन की जगह वह "ऊँ-ऊँ-ऊँ" करती थी। लाली को एक ही काम सबसे अच्छा लगता था। आग बुझाना। एक…

कल्पना और अचरजHI

मीनू की छींक और टूटता तारा

मीनू की छींक पूरे गाँव में सबसे ज़ोर की थी। जब वह छींकती, तो बाड़ पर बैठी मुर्गियाँ धप से नीचे गिर जाती थीं। आज रात मीनू को टूटता तारा देखना था। दादी ने कहा…

कल्पना और अचरजHI

मीनू और बोलता दरवाज़ा

“खोलो, खोलो, चाबी ऊपर है!” बग़ीचे की दीवार के छोटे दरवाज़े से आवाज़ आई, और मीनू टिफ़िन लेकर वहीं रुक गई। बग़ीचे में सब जानते थे कि यह दरवाज़ा बोलता है। इसके…

हिम्मत और डरHI

लल्लू की खोज

“मेरा लल्लू कहाँ है?” मीनू ने तकिया उठाकर पूछा। लल्लू उसका नरम सफ़ेद खरगोश था। उसके बिना मीनू को नींद नहीं आती थी। और आज रात बाहर बादल भी बोल रहे थे।…

हिम्मत और डरHI

मीनू और लुढ़कती टॉर्च

मीनू को रात में पानी पीना था, पर कमरे में बहुत अंधेरा था। उसने तकिये के पास से अपनी छोटी टॉर्च उठाई। टॉर्च हाथ से फिसल गई और लुढ़कने लगी। लुढ़क, लुढ़क, लुढ़क।…

हिम्मत और डरHI

तारा की लालटेन

तारा एक छोटी खोजकर्ता थी, और उसकी लालटेन ऐसी थी कि जब भी कोई पास में हँसता, वह और तेज़ चमकने लगती। एक सुबह तारा बंदरगाह पर गई। वहाँ छोटी-छोटी नावें पानी पर हिल…

पहली-पहली बारHI

मीनू और गुलाबी खीर

"ये गुलाबी-गुलाबी क्या है, दादी?" मीनू ने कटोरी में झाँककर पूछा। दादी चूल्हे पर रोटी सेंक रही थीं। "चुकंदर की खीर है, मीनू। आज पहली बार बनाई है। चखकर बताओ,…