पवनचक्की वाली डॉक्टर दीदी
मीतू को आज अपने दिल की धक-धक सुननी थी। डॉक्टर दीदी के पास एक सुनने वाली नली थी, और मीतू ने सुना था कि उससे दिल बोलता है। मीतू और मम्मी सुबह-सुबह घर से चलीं।…
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मीतू को आज अपने दिल की धक-धक सुननी थी। डॉक्टर दीदी के पास एक सुनने वाली नली थी, और मीतू ने सुना था कि उससे दिल बोलता है। मीतू और मम्मी सुबह-सुबह घर से चलीं।…
मीनू की लाल साइकिल पगडंडी पर डगमग-डगमग चल रही थी। मीनू ने हैंडल कसकर पकड़ रखा था और उसकी आँखें अपने पैरों पर थीं। आज उसे आम के पेड़ से बगीचे के फाटक तक जाना…
नीलू सब्ज़ियों के बगीचे में गाजर खींच रही थी। किनारे पर पुदीना और धनिया लगे थे, और मधुमक्खियाँ गुनगुन कर रही थीं। नीलू का आगे का एक दाँत हिल रहा था। हिल-हिल,…
मीनू को स्कूल में अपना लाल बस्ता अपने हुक पर टाँगना था। आज स्कूल का पहला दिन था। टीचर जी ने कहा था, “मीनू, तुम्हारे हुक पर पीली मछली बनी है।” मीनू दीवार के पास…
तारा झूले की रस्सी पकड़कर पंजों के बल खड़ी थी। बस, अब उसकी बारी आने वाली थी। उसे झूले पर बैठकर हवा में उड़ना था। पर झूले पर भोलू बैठा था। वह ऊपर जा रहा था, और…
तनु ने पौधों वाले शीशे के घर में एक छोटा गड्ढा देखा। उसमें पानी भरा था। तनु ने पैर रखा तो धुम! पानी ढोल की तरह बज उठा। यहाँ सब जानते थे कि गड्ढे का पानी ऐसे ही…
“कोई है क्या?” ग्रीनहाउस के पीछे से किसी ने धीरे से पूछा, और मीनू दबे पाँव उसी तरफ़ चल दी। मीनू को एक दोस्त चाहिए था। नानी के ग्रीनहाउस में भाप जैसी गर्मी थी,…
“यह मेरी बाल्टी है, मैं इसे अकेले भरूँगा,” गोलू ने कहा। उसके हाथ में नई लाल बाल्टी थी। वह बाग़ में जामुन तोड़ने आया था। उसे पूरी बाल्टी भरनी थी, ऊपर तक। पास…
भावनाएँHI
मेघू छोटा-सा बादल था, और उसे आज बस एक काम करना था। पहाड़ी पर खड़े छोटे पौधे को पानी पिलाना। पौधा सुबह से मुरझाया हुआ था। उसकी पत्तियाँ नीचे झुकी थीं। पास की…
भावनाएँHI
सीढ़ियों के नीचे एक छोटा-सा दरवाज़ा था, और आज उसके पीछे आँगन नहीं, रसोई थी! मीता को यह अजीब नहीं लगा। उस घर का दरवाज़ा हमेशा उसी कमरे में खुलता था, जहाँ सबसे…
भावनाएँHI
तिन्नू का घर नदी किनारे था, और पूरे गाँव में अकेला वही हर पत्थर को नाम से बुलाता था। "आओ, गोलू। आओ, चपटी रानी।" वह पत्थर उठाता और एक के ऊपर एक रखता जाता। आज…
टुन्नू पूरे हाथी परिवार में अकेला ऐसा हाथी था, जो अपनी सूँड़ से सीटी बजा सकता था। उस रात उसे नींद नहीं आ रही थी। कल सुबह सब बर्फ़ वाली पहाड़ी पर फिसलने जाएँगे!…
गाँव के एक छोटे से घर के आँगन में धूप बिछी थी। मीनू वहीं बैठी थी, और उसके सामने मिट्टी की कटोरियाँ रखी थीं। आज ननिहाल से नाना आ रहे थे। हर बार नाना कहते थे,…
नए घर के कमरे में डिब्बों का पहाड़ खड़ा था। मीनू अपने भालू को ढूँढ रही थी। भालू का नाम भूरू था, और उसके गले में एक छोटी घंटी बँधी थी। रात होने वाली थी, और भूरू…
“आज की रोटी मैं बनाऊँगी,” मीनू ने कहा। वह नानी की रसोई में खड़ी थी। उसे नानी की थाली के लिए एक गोल रोटी बनानी थी, पूरे चाँद जैसी। नानी दरवाज़े पर सब्ज़ीवाले से…
मनु को इसमें कुछ अजीब नहीं लगता था। पिनचक्कियाँ तो ऐसी ही होती हैं! आज घर में नन्ही बहन आई थी, मिनी। मनु बस एक बार उसे हँसते हुए देखना चाहता था। पर मिनी रो रही…
मीतू दबे पैर बरामदे में चल रही थी। उसके हाथ में एक छोटी टोकरी थी, और टोकरी में नरम कंबल। ऊपर नीली लालटेन जल रही थी। इस गाँव में सब जानते थे कि लालटेन नीली हो,…