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सोते समय की कहानियाँ: घर-परिवार

6 कहानियाँ

अभी-अभी लिखी गईं· हिन्दी

घर-परिवारHI

मीनू और कांच की बरनी

मीनू आँगन की मुंडेर पर मिट्टी के दीये रख रही थी। एक, दो, तीन... पूरे दस। आज दिवाली की रात थी, और मीनू को सारे दीये अपने हाथ से जलाने थे। “धीरे-धीरे जलाना,…

घर-परिवारHI

हाथियों का परिवार

टुन्नू पूरे हाथी परिवार में अकेला ऐसा हाथी था, जो अपनी सूँड़ से सीटी बजा सकता था। उस रात उसे नींद नहीं आ रही थी। कल सुबह सब बर्फ़ वाली पहाड़ी पर फिसलने जाएँगे!…

घर-परिवारHI

छोटी कटोरी कहाँ गई

गाँव के एक छोटे से घर के आँगन में धूप बिछी थी। मीनू वहीं बैठी थी, और उसके सामने मिट्टी की कटोरियाँ रखी थीं। आज ननिहाल से नाना आ रहे थे। हर बार नाना कहते थे,…

घर-परिवारHI

मीनू और छन-छन वाला भालू

नए घर के कमरे में डिब्बों का पहाड़ खड़ा था। मीनू अपने भालू को ढूँढ रही थी। भालू का नाम भूरू था, और उसके गले में एक छोटी घंटी बँधी थी। रात होने वाली थी, और भूरू…

घर-परिवारHI

मीनू की गोल रोटी

“आज की रोटी मैं बनाऊँगी,” मीनू ने कहा। वह नानी की रसोई में खड़ी थी। उसे नानी की थाली के लिए एक गोल रोटी बनानी थी, पूरे चाँद जैसी। नानी दरवाज़े पर सब्ज़ीवाले से…

घर-परिवारHI

मनु की पिनचक्की उल्टी घूमती थी, जब मनु उसे नहीं देख रहा होता था।

मनु को इसमें कुछ अजीब नहीं लगता था। पिनचक्कियाँ तो ऐसी ही होती हैं! आज घर में नन्ही बहन आई थी, मिनी। मनु बस एक बार उसे हँसते हुए देखना चाहता था। पर मिनी रो रही…