भावनाएँHI
मीनू की लालटेन
“मम्मी, मैं यहीं खड़ी रहूँगी,” मीनू ने धीरे से कहा। वह आज ही नए घर में आई थी। छत पर बगीचा था, और रस्सी पर रंगीन लालटेनें टँगी थीं। कुछ बच्चे खेल रहे थे। मीनू…
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भावनाएँHI
“मम्मी, मैं यहीं खड़ी रहूँगी,” मीनू ने धीरे से कहा। वह आज ही नए घर में आई थी। छत पर बगीचा था, और रस्सी पर रंगीन लालटेनें टँगी थीं। कुछ बच्चे खेल रहे थे। मीनू…
भावनाएँHI
मेघू छोटा-सा बादल था, और उसे आज बस एक काम करना था। पहाड़ी पर खड़े छोटे पौधे को पानी पिलाना। पौधा सुबह से मुरझाया हुआ था। उसकी पत्तियाँ नीचे झुकी थीं। पास की…
भावनाएँHI
सीढ़ियों के नीचे एक छोटा-सा दरवाज़ा था, और आज उसके पीछे आँगन नहीं, रसोई थी! मीता को यह अजीब नहीं लगा। उस घर का दरवाज़ा हमेशा उसी कमरे में खुलता था, जहाँ सबसे…
भावनाएँHI
तिन्नू का घर नदी किनारे था, और पूरे गाँव में अकेला वही हर पत्थर को नाम से बुलाता था। "आओ, गोलू। आओ, चपटी रानी।" वह पत्थर उठाता और एक के ऊपर एक रखता जाता। आज…