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सोते समय की कहानियाँ: शरीर और इंद्रियाँ

6 कहानियाँ

अभी-अभी लिखी गईं· हिन्दी

शरीर और इंद्रियाँHI

मीनू की आधी पिचकारी

"मेरी पिचकारी कहाँ है?" मीनू ने बक्सा खोलते हुए पूछा। आज होली थी। मीनू को सबसे पहले दादी को गुलाबी रंग लगाना था। दादी आँगन में बैठी गुजिया की थाली सजा रही थीं।…

शरीर और इंद्रियाँHI

बिट्टू और गाने वाला फाटक

बिट्टू एक पैर पर कूदता हुआ आँगन में दौड़ रहा था। सुबह की धूप अभी-अभी खेत पर उतरी थी। मुर्गा बोल चुका था, गाय उठ चुकी थी, और आँगन का फाटक अपनी रोज़ की धुन गा…

शरीर और इंद्रियाँHI

मीनू और गुनगुनाता पुल

“मेरा ब्रश कहाँ है?” मीनू ने पूछा। रात हो गई थी। मीनू को दाँत साफ़ करके सोना था। पेस्ट शेल्फ़ पर रखा था। कप भी रखा था। बस ब्रश नहीं था। “ब्रश, ब्रश, कहाँ है…

शरीर और इंद्रियाँHI

मीतू की नाक बहुत ख़ास थी। वह बारिश को आने से पहले सूँघ लेती थी।

एक दोपहर उसने आँगन में हवा सूँघी और दौड़कर बोली, “नानी, बारिश आ रही है!” नानी खाट पर लेटी थीं। उनकी नाक बंद थी। “मुझे तो कुछ सूझता ही नहीं,” वे बोलीं। “काश,…

शरीर और इंद्रियाँHI

मीनू की छींक

मीनू को छुपम-छुपाई में जीतना था, इस बार भैया से ज़रूर। भैया गोलू दीवार की तरफ़ मुँह करके गिन रहा था, "एक, दो, तीन…" मीनू भागकर बड़ी अलमारी में घुस गई। अंदर…

शरीर और इंद्रियाँHI

स्पेशल कंबल

बारिश के बाद घर का आँगन गीला और चमकदार था। टीनू वहाँ अपना पीला कंबल लेकर खड़ी थी। कंबल के कोने पर एक छोटा-सा तारा बना था। उसके बिना टीनू को नींद नहीं आती थी।…