मीनू की पतंग बादल के पास
मीनू को गिनती करना इतना पसंद था कि वह सीढ़ियाँ भी गिनकर चढ़ती थी। एक, दो, तीन… बारह सीढ़ियाँ, और फिर छत। आज छत पर अच्छी हवा चल रही थी। मीनू के हाथ में लाल पतंग…
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मीनू को गिनती करना इतना पसंद था कि वह सीढ़ियाँ भी गिनकर चढ़ती थी। एक, दो, तीन… बारह सीढ़ियाँ, और फिर छत। आज छत पर अच्छी हवा चल रही थी। मीनू के हाथ में लाल पतंग…
“मैं आज अपना बीज ज़रूर बोऊँगी!” मीनू ने कहा। दादी ने उसे एक नन्हा, काला बीज दिया था, बिल्कुल तिल जितना छोटा। मीनू ने उसे हथेली पर रखा और फाटक के पास आँगन में…
मीनू के जूते चलते समय चूँ-चूँ बोलते थे। पूरी गली में किसी और के जूते ऐसे नहीं बोलते थे। उस दिन सुबह से बारिश हो रही थी। नीम के पेड़ के नीचे एक बड़ा पोखर बन गया…
"मुझे ठंड लग रही है," आँगन के नीम ने धीरे से कहा। मीनू ने यह सुना और झट से दौड़ी आई। नीम रोज़ मीनू से बातें करता था। इसमें किसी को अचरज नहीं था। पर आज उसकी…