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Fabulada

सोते समय की कहानियाँ: कल्पना और अचरज

3 कहानियाँ

अभी-अभी लिखी गईं· हिन्दी

कल्पना और अचरजHI

मीनू की लाल नाव

“चल मेरी नाव, चल!” मीनू ने कहा। उसने अभी-अभी अपनी लाल कागज़ की नाव पानी में रखी थी। बाहर बारिश हो रही थी। आँगन से होकर एक पतली धार बह रही थी। मीनू चाहती थी कि…

कल्पना और अचरजHI

मीनू की छींक और टूटता तारा

मीनू की छींक पूरे गाँव में सबसे ज़ोर की थी। जब वह छींकती, तो बाड़ पर बैठी मुर्गियाँ धप से नीचे गिर जाती थीं। आज रात मीनू को टूटता तारा देखना था। दादी ने कहा…

कल्पना और अचरजHI

मीनू और बोलता दरवाज़ा

“खोलो, खोलो, चाबी ऊपर है!” बग़ीचे की दीवार के छोटे दरवाज़े से आवाज़ आई, और मीनू टिफ़िन लेकर वहीं रुक गई। बग़ीचे में सब जानते थे कि यह दरवाज़ा बोलता है। इसके…