भावनाएंहिन्दी
नन्हा बादल मेघू
मेघू छोटा-सा बादल था, और उसे आज बस एक काम करना था। पहाड़ी पर खड़े छोटे पौधे को पानी पिलाना।
पौधा सुबह से मुरझाया हुआ था। उसकी पत्तियाँ नीचे झुकी थीं। पास की घास में एक मेंढक बैठा था। वह भी बारिश का इंतज़ार कर रहा था, क्योंकि बारिश आए तभी वह गा सकता था।
उस दुनिया में परछाइयाँ देर से चलती थीं। सुबह वे पीछे रह जाती थीं और दोपहर को ही अपनी चीज़ों के पास पहुँचती थीं। मेघू की परछाईं अभी दूर पहाड़ी पर धीरे-धीरे आ रही थी।
मेघू पौधे के ऊपर आ गया। उसने ज़ोर लगाया। टप! बस एक बूँद गिरी।
“इतनी-सी?” मेंढक ने कहा। “इससे तो मेरी नाक भी गीली नहीं होगी।”
मेघू ने गाल फुलाए। फिर ज़ोर से हवा खींची। फिर और ज़ोर लगाया। टप! फिर एक ही बूँद।
उसने सोचा, शायद ऊँचा जाकर कोशिश करूँ। वह ऊपर गया और नीचे आया, ऊपर गया और नीचे आया। पर पौधा वैसा ही झुका रहा।
मेघू उदास हो गया। वह धीरे-धीरे नीचे बैठ गया। उसका सफ़ेद रंग फीका पड़ने लगा, फिर भूरा, फिर स्लेटी। वह भारी हो गया, जैसे गीला तौलिया।
तभी पौधे की एक पत्ती पर कुछ गिरा। टप, टप, टप।
मेघू ने नीचे देखा। ये उसके अपने आँसू थे!
“अरे,” उसने धीरे से कहा। “मैं तो भरा हुआ हूँ।”
अब उसे ज़ोर नहीं लगाना था। उसे बस ढीला होकर बैठे रहना था। उसने अपना उदास मन खोल दिया, और बूँदें एक के पीछे एक उतरने लगीं। टप, टप, टप।
पत्तियाँ धीरे-धीरे ऊपर उठीं। मेंढक ने गला साफ़ किया और गाने लगा, “टर्र-टर्र!” पर वह इतना ज़ोर से बोला कि उसकी आवाज़ फिसल गई, और वह खुद हँस पड़ा।
ठीक तभी मेघू की परछाईं पहाड़ी चढ़कर आ पहुँची। वह पौधे के पास गीली घास पर चुपचाप लेट गई।
मेघू हल्का होकर वहीं रहा। पत्ती की नोक पर एक बूँद चमक रही थी।