परिवार और घरहिन्दी
मनु की पिनचक्की उल्टी घूमती थी, जब मनु उसे नहीं देख रहा होता था।
मनु को इसमें कुछ अजीब नहीं लगता था। पिनचक्कियाँ तो ऐसी ही होती हैं!
आज घर में नन्ही बहन आई थी, मिनी। मनु बस एक बार उसे हँसते हुए देखना चाहता था।
पर मिनी रो रही थी। “ऊँआँ, ऊँआँ!”
“मिनी, देखो तो!” मनु ने मछली जैसा मुँह बनाया। मिनी और ज़ोर से रोई।
मनु ने गाना गाया। मिनी फिर भी रोई। उसने अपना लकड़ी का घोड़ा दिया। मिनी ने उसे पकड़ा, और घोड़ा टप से नीचे गिर गया।
“अम्मा, मिनी हँसती क्यों नहीं?”
अम्मा मिनी को थपकते हुए बोलीं, “उसे नींद आ रही है, मनु। मैं उसे सुलाने की कोशिश कर रही हूँ।”
मनु खिड़की के पास जाकर बैठ गया और सोचने लगा। तभी उसने कुछ सुना। खर्र-खर्र-खर्र।
मनु ने मुड़कर देखा। मिनी का रोना धीमा पड़ गया था। वह खिड़की पर रखी पिनचक्की को देख रही थी।
मनु को एक बात सूझी। उसने पिनचक्की उठाई और मिनी के सामने रखी। पिनचक्की सीधी घूमी, फिर-फिर-फिर। मिनी चुप हो गई।
फिर मनु ने जानबूझकर मुँह दूसरी तरफ़ कर लिया। खर्र-खर्र-खर्र! पिनचक्की उल्टी घूमने लगी।
“मिनी, अब देखना!” मनु झट से पलटा।
पिनचक्की हड़बड़ा गई। वह रुकी, डगमगाई, और जल्दी से सीधी घूमने लगी, जैसे कुछ हुआ ही न हो।
“ही-ही!” मिनी हँस पड़ी।
मनु ने फिर मुँह फेरा। खर्र-खर्र-खर्र! फिर पलटा। पिनचक्की फिर हड़बड़ाई।
“ही-ही-ही!”
अम्मा ने मुस्कुराकर मनु को देखा। मिनी की छोटी-सी मुट्ठी मनु की उँगली पर कस गई। उसकी पलकें भारी होने लगीं, और पिनचक्की धीरे-धीरे घूमती रही, फिर-फिर-फिर।